मुक्त्य
पांव-पांव चलना पड़ा,
डगर-डगर रुकना पड़ा ,
जिंदगी तेरी चौखट पर,
बार-बार झुकना पढ़ा
तवायफ सी खरीदी,
कोडियों के मोल खुशियां
हाट -हाट किस्मत से हमें,
बेभाव बिकना पढ़ा
अनमोल अरोड़ा
मुक्त्य
पांव-पांव चलना पड़ा,
डगर-डगर रुकना पड़ा ,
जिंदगी तेरी चौखट पर,
बार-बार झुकना पढ़ा
तवायफ सी खरीदी,
कोडियों के मोल खुशियां
हाट -हाट किस्मत से हमें,
बेभाव बिकना पढ़ा
अनमोल अरोड़ा
अपने सीने से लगा कर हुये उम्मीद की लाशमुद्दो की ज़िंदगी कोनख़ुश किया है मैंनेऐ कविता तुने तो एक हीगम से किया था दो चारदिल को हर तरह सेबर्बाद किया है मैंने
हर गजल का प्यार से आगाज़ होना चाहिए, शेर कहने का यही अंदाज होना चाहिए। दोस्तों की दोस्ती पर नाज होना चाहिए, दुश्मनों से प्यार का आगाज हो...