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Sunday, 3 March 2013

Ek SAFAR Acha laga , Ek Hamsafar Achaa laga



Guftagoo Achee Lagi Zoq-e-Nazar Acha Laga

Muddato’n Baad ek Hamsafar Achaa Lagaa

Manzilo’n ki Baat Choro Kis Ny Payee hain Manzilain

Ek SAFAR Acha laga , Ek Hamsafar Achaa laga

Monday, 28 January 2013

ये दिल कुछ और समझा था



वो जज्बों की तरह थी ये दिल कुछ और समझा था,
उसे हंसने की आदत थी ये दिल कुछ और समझा था...
मुझे उस ने कहा आओ नई दुनिया बसाते हैं,
उसे सूझी थी शरारत ये दिल कुछ और समझा था...
वो मेरे पास बैठे देर तक ग़ज़लें मेरी सुनती...
उसे खुद से मोहब्बत थी ये दिल कुछ और समझा था...
हमेशा उसकी आँखों में धनक के रंग होते थे,
ये उसकी आम आदत थी ये दिल कुछ और समझा था...
मुझे वो देखकर अक्सर निगाहें फेर लेती थी,
ये दरपर्दा हरक़त थी ये दिल कुछ और समझा था

👌: प्यार का आगाज :👌

 हर गजल का प्यार से आगाज़ होना चाहिए,  शेर कहने का यही अंदाज होना चाहिए।  दोस्तों की दोस्ती पर नाज होना चाहिए,  दुश्मनों से प्यार का आगाज हो...